लोन की अवधि कम करें या EMI? (Reduce Tenure vs EMI)
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लोन की अवधि कम करें या EMI? (Reduce Tenure vs EMI)
जब आप प्रीपेमेंट (Prepayment) करते हैं, तो बैंक पूछता है: अवधि कम करें या EMI? जानिए कौन सा विकल्प आपको लाखों रुपये बचाएगा।
लोन की अवधि कम करें या EMI? (Reduce Tenure vs EMI)
भारतीय घर खरीदार अक्सर बोनस या बचत का उपयोग करके अपने होम लोन का आंशिक भुगतान (Part-Payment) करते हैं। जब आप बैंक को चेक देते हैं, तो एक चेकबॉक्स होता है: 1. Reduce Tenure (अवधि कम करें) 2. Reduce EMI (किस्त कम करें) अधिकांश लोग "EMI कम करें" चुनते हैं ताकि मासिक राहत मिले। यह एक महंगी गलती है।मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
1. गणित (The Math)
मान लीजिए आपके पास ₹50 लाख का लोन है, 8.5% ब्याज दर पर, 20 साल के लिए। ईएमआई: ₹43,391। आप ₹1 लाख का एकमुश्त भुगतान (Prepayment) करते हैं।विकल्प A: EMI कम करें
विकल्प B: अवधि कम करें
2. क्यों होता है ऐसा?
लोन में समय (Time) पैसे का दुश्मन है। आप बैंक का पैसा जितने लंबे समय तक रखेंगे, उतना ही अधिक ब्याज देंगे।3. हाइब्रिड रणनीति (The Smart Strategy)
यदि आपको मासिक नकदी प्रवाह (Cashflow) की चिंता है, तो आप EMI कम कर सकते हैं। लेकिन समझदार निवेशक क्या करते हैं? 1. बैंक से EMI कम करवाएं (सुरक्षा के लिए)। 2. लेकिन अपनी तरफ से पुरानी (उच्च) EMI का भुगतान करना जारी रखें। 3. वह अंतर (Difference) सीधे मूलधन में जाएगा। यह आपको लचीलापन देता है (बुरे वक्त में कम भुगतान करें) लेकिन अनुशासित रहने पर अवधि कम करने जैसा ही लाभ देता है।4. निष्कर्ष
डिफ़ॉल्ट रूप से, बैंक अक्सर "EMI कम करें" का विकल्प चुनते हैं क्योंकि इससे उन्हें अधिक लाभ होता है। आपको सक्रिय रूप से "Reduce Tenure" का निर्देश देना होगा। याद रखें: छोटा लोन एक अच्छा लोन है।टैग
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